Sunday, January 15, 2012

ग़ज़ल :हँसने, मुस्कुराने के ओ दिन गुजर गए.



हँसने, मुस्कुराने के ओ दिन गुजर गए.
ओ जूनून,ओ जज्बात सब दिल से उतर गए.
अब रहा नहीं ओ मौसम,न रही चमन की रौनक,
अब तो फूलों की बेरुखी से, भौरे भी डर गए.
चाँद तारों के आँगन में भी,सिमटने लगे उजाले,
सच कहिये तो अंधेरों के भी, किस्मत संवर गए.
अब नहीं रहा वो अपनापन,न रहा ही भाईचारा,
नफरत की तीखी गंध से,सबके दामन भर गए.
समंदर के सफर में, अब ओ सुकून नहीं रहा,
क्योंकि सारे हसीं मंजर, लहरों में बिखर गए
बस याद बनकर रह गए, "अंसारी" गुजरे दिन,
जब से नए ज़माने के रंग पसर गए.

Monday, January 9, 2012

ग़ज़ल :कुछ चीज़ों की कीमत छुपाने से बढती है.


 
   चेहरे की चमक तो मुस्कुराने से बढती है.
   रिश्तों की अहमियत तो निभाने से बढती है.
         मायने ये नहीं रखता की कितना तुम कमाते हो,
     क्योंकि दौलत की कद तो बचाने से बढती है.
      दिखावापन हर एक चीज़ का अच्छा नहीं होता,
   कुछ चीज़ों की कीमत तो छुपाने से बढती है.
दोस्तों, दूरियां तो  दर्द देती आई है सदा से,
     और नजदीकियां  तो घर आने-जाने से बढती है.
   "नूरैन" गैरों की रुसवाई पे हम आह नहीं करते,
       तड़प तो अपनों के हाथों चोट खाने से बढती है.

Thursday, January 5, 2012

कविता : माना की मेरी जान तुम खुबसूरत हो.


माना की मेरी जान तुम खुबसूरत हो.
मेरी संगदिल तन्हाई की सख्त जरूरत हो.
       मेरे लिए मुस्कुरा के तुने जो अहसान किया है.
      एवज में हमने भी अपना दिल तुझपे कुर्बान किया है.
अब तो चैन मुझे आता नहीं, और नींद गयी है भाड़  में.
सारा Schedule गड़बड़ हुआ तुझसे मिलने के जुगाड़ में.
                मेरी तड़प की तहखाने में एक कशिश है तुझको पाने की.
                Web Camera हो तो देख लो हालत अपने दीवाने की.
ठण्ड में, एक हफ्ता पहलें मैंने स्नान किया है.
एवज में हमने भी अपना दिल तुझपे कुर्बान किया है.                         
         कुछ इस कदर मैं खोया हूँ दिलबर तेरे smile में.
         की आधी Salary मेरी निकल जाती है Mobile में.
                      Appraisal कुछ हुआ नहीं,जीता हूँ,जिंदगी उधारी का.
                      कैसे करूं मैं हाल-ए-जिक्र, अपनी बेबस लाचारी का.                        
बस घटा ही हुआ, जब से प्रेम का,  दूकान किया है.
एवज में हमने भी अपना दिल तुझपे कुर्बान किया है.                         

कविता : इस नए साल की प्रियतम तुझको कैसे दू बधाई. (Happy New Year 2012)

 
इस नए साल की प्रियतम तुझको कैसे दू बधाई.
रोता है तेरे बिन ह्रदय, सुनी आँखे है भर आई..
इस दूर-देश की आबोहवा में डसती है तन्हाई...
 
कसक जगा जाती है दिल में, आके याद पुरानी.
फीकी लगती है तेरे बिन,हर रूत की रंगत नूरानी.
देख के हर शय को लगता है,खड़ी है तू शरमाई.
इस नए साल..............................
 
खिंच रहे है मन को मेरे, तेरे प्रीत के धाग्गे.
जोर नहीं चलता है कोई,बेबस हूँ इनके आगे.
सिसकती है  तेरे खातिर,उम्मीदों की कलियाँ कुह्म्लाई..
इस नए साल..............................
 
ख़त के खतूत से ख्वाहिस मन के,रहते है अधूरे.
ना जाने दर्दे-जुदाई के ये दिन, कब तक होंगे पूरे.
चुभती है काँटों की मानिंद,अब अपनी ही परछाई.
इस नए साल.............................