Wednesday, February 29, 2012

गजल : बात करने से ही बनती है बात दोस्तों.

 
 
बात करने से ही बनती है बात दोस्तों.
अब छोडो ये  ख़ामोशी का साथ दोस्तों.
माना की बहूत दर्द है आज हमारे सीने में,
पर महज तड़प से नहीं बदलेगी,हालात दोस्तों,
कुछ ना पावोगे उम्मीदों की महफ़िल सजाने से,
जब तक हो ना उसपे अमल की बरसात दोस्तों.
कल का चेहरा दुनिया में देखा है किसने अबतक,
जो भी करना है कर दो अभी शुरुवात दोस्तों.
मरना है एक दिन सबको चाहे राजा हो या रंक,
फिर किसी से क्यों मांगे खैरात में हयात दोस्तों.
"नूरैन" जख्मों के शहर में दर्द का दवा नहीं मिलता,
खुद ही करना पड़ता है मरहम से मुलाकात दोस्तों.

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