Friday, February 10, 2012

ग़ज़ल : जब हंसी होंठों पे तेरे बिखर जाती है..



जब हंसी, होंठों पे तेरे बिखर जाती है.
मुरझी कलियों की सूरत निखर जाती है.
... जर्रे-जर्रे से आती है खुसबू तुम्हारी,
बिन्दाश हवाए भी कुछ पल ठहर जाती है.
गूंजते है फिजाओं में ,बस तेरे तराने,
जिधर भी देखू उधर तू नज़र आती है.
जो भी देखे हो जाए दीवाना तेरा,
तेरी कशिश धडकनों में उतर जाती है.
सुकून मिलता है मुझको तुझे देखकर,
आहट तेरी मन को खुशियों से भर जाती है.
ना पूछों मेरे दिल पे बीतता है क्या ?
मेरी राहों से जब तू गुजर जाती है.

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