Monday, December 19, 2011

ग़ज़ल : वरना टूटे हुए दिल का फौलाद कम नहीं होता



घर के खाने का कभी स्वाद कम नहीं होता.
किसी से बिछड़ जाने से,याद कम नहीं होता.
मजबूरियों के सदके ही फासले बन जाते है,
वरना प्रेम और अपनापन का मियाद कम नहीं होता.
तुम्हारी हंसी में ही दिखती है मेरी अपनी खुशनसीबी,
वरना टूटे हुए दिल का फौलाद कम नहीं होता.
बात करने से ही बनती है हरदम बात दोस्तों,
खामोशियों से हरगिज बिबाद कम नहीं होता.
"नूरैन" बिखरने दो होंठों पे हंसी के फुहारों को,
प्रेम से बात कर लेने से जायदाद कम नहीं होता.

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