Friday, August 5, 2011

ग़ज़ल : रमजान मुबारक..



हर साल में एक बार आता है रमजान.
पैगाम  भाईचारे का लाता  है रमजान. 
मिटाता है दिलों से नफरत और अदावत को,
जिंदगी सादगी से जीने को सिखलाता है रमजान.
बारिश शवाब की होती है इस पाक महीने में,
सौगात बरकतों का हमे दे  जाता है रमजान.
झूम उठती है जमी रोजदारों की इबादत से,
दुआओं को सीधे रब तक पहूंचता है रमजान.
ये याद दिलाता है हमे बेबस,भूखों बेसहारों की,
उनके दर्द भरे एहसासों को समझाता है रमजान.
 

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