Friday, August 5, 2011

कविता : "बंद करो मजहब के नाम पे लड़ाई"


धर्म के नाम  पर क्यों करते हो  भैया तुम  लड़ाई.
जरा एक नज़र तो देख लो इस तस्वीर की परछाई.

झलकता है इसमें साफ़-साफ़ Culture  अपने  देश का.
जहा ना मात्र भी जगह नहीं है हिंसा और कलेश का.
अपनापन और भाईचारा का  ये बहूत बढ़िया मिशाल है..
सच में तहजीब गंगा जमुना का ऐसे लोगों से बहाल है.

ऐसे लोगों से ही होती है जग में भारत की  बड़ाई.
जरा एक नज़र तो देख लो इस तस्वीर की परछाई.

लोग क्यों भूल जाते है नफरत में प्रेम का पावन भाषा.
धर्म के नाम पर निकालते है अपने कुंठित मन का हतासा.
हर मजहब से पहले हो इंसानियत की पूजा.
भाईचारा के बाद ही नाता हो कोई दूजा.

क्योंकि प्रेम की ताकत से भरती है हर जख्म की खाई.
जरा एक नज़र तो देख लो इस तस्वीर की परछाई..

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