Salary आती है टेस्ट मैच की तरह और चली जाती है ट्वेंटी-ट्वेंटी की तरह.
फिर पुरे महीने बजती है जिंदगी,किसी उजड़े स्कूल की टूटी घंटी की तरह.
एक बेचारी Salary उसपे कितने अथाह बोझ.
बेदर्दी से उसी का USE हम करते है हर रोज.
हजारों समस्याओं से घिरी Salary खुद को बचाने में असमर्थ है.
-- इसकी समृद्धि के लिए दुआ करना दोस्तों फिलहाल ब्यर्थ है.
तरस आता है मुझे अपनी Salary पे जो करती है तन-मन से मेरी सेवा.
और एक हम है जो उसे एक हफ्ते भी सुहागन नहीं रहने देते कर देते है निर्मम बेवा.
कोसे भी तो किसे कोसे,खुद को, हालात को या उन्हें जिन्होंने salary हमारी बनायीं है.
कोस नहीं सकते कुपोषण के शिकार अपनी Salary को,जो हजारों बार इज्जत हमारी बचाई है.
फिर पुरे महीने बजती है जिंदगी,किसी उजड़े स्कूल की टूटी घंटी की तरह.
एक बेचारी Salary उसपे कितने अथाह बोझ.
बेदर्दी से उसी का USE हम करते है हर रोज.
हजारों समस्याओं से घिरी Salary खुद को बचाने में असमर्थ है.
-- इसकी समृद्धि के लिए दुआ करना दोस्तों फिलहाल ब्यर्थ है.
तरस आता है मुझे अपनी Salary पे जो करती है तन-मन से मेरी सेवा.
और एक हम है जो उसे एक हफ्ते भी सुहागन नहीं रहने देते कर देते है निर्मम बेवा.
कोसे भी तो किसे कोसे,खुद को, हालात को या उन्हें जिन्होंने salary हमारी बनायीं है.
कोस नहीं सकते कुपोषण के शिकार अपनी Salary को,जो हजारों बार इज्जत हमारी बचाई है.
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