Monday, July 11, 2011

ग़ज़ल : फिर मुझ से रिश्ता तोड़ के तुम चले जाना..................


आंसू बह रहे है इन्हें रुक जाने दो  पलभर.
दर्द की घनी घटाओं को छुप जाने दो पलभर.
         जब रूठे होंठ  शुरू कर दे फिर से मुस्कुराना.
         तब मुझ से रिश्ता तोड़ के तुम चले जाना.
जब मेरे अपने भी लगने लगे पराये.
चुभने लगे जब भीड़ में तन्हाई के साए.
मिट जाए जब मन से अपनापन की दाग.
कहने लगे जब बेवफा मुझको लोग-बाग़.
       जब सरेराह ये दुनियावाले मारे मुझ पर ताना.
       फिर मुझको तनहा छोड़ के तुम चले जाना.
बुझ जाने दो शबनम की ये प्यास अधूरी.
मिट जाने दो धड़कन से धड़कन की दुरी.
हसरत ना रह जाए तेरे बिन कोई बाकी.
पिला दे आँखों से जी भर के जाम मुझे साकी.
       मदहोशी शुरू कर दे जब मेरे तन-मन पे छाना.
       फिर मुझसे मुंह मोड़  के तुम चले जाना.

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