बहूत कुछ खो दिए है हम कुछ पाने के लिए.
तरसते है अब तो होंठ भी मुस्कुराने के लिए.
यूँ बिक चुके है आज हम हालात के हाथों,
की दो पल फुर्सत नहीं घर पे बिताने के लिए,
जलते नही है आज भी कितने घरों के चूल्हे,
कही हम हजारों लूटा देते है मैयखाने के लिए.
बना तो लेते है हम दोस्त, हर कदम पे हजारों,
मगर कभी सोचते नहीं ये रिश्ते निभाने के लिए.
सौदा कर बैठे इतना, आगे बढ़ने की होड़ में,
की पास बचा नही कुछ भी इन्सान कहलाने के लिए.
"नूरैन" कम मुश्किल नहीं है घर चलाना, देश से,
फिर कहा से फुर्सत हम निकाले ज़माने के लिए.
तरसते है अब तो होंठ भी मुस्कुराने के लिए.
यूँ बिक चुके है आज हम हालात के हाथों,
की दो पल फुर्सत नहीं घर पे बिताने के लिए,
जलते नही है आज भी कितने घरों के चूल्हे,
कही हम हजारों लूटा देते है मैयखाने के लिए.
बना तो लेते है हम दोस्त, हर कदम पे हजारों,
मगर कभी सोचते नहीं ये रिश्ते निभाने के लिए.
सौदा कर बैठे इतना, आगे बढ़ने की होड़ में,
की पास बचा नही कुछ भी इन्सान कहलाने के लिए.
"नूरैन" कम मुश्किल नहीं है घर चलाना, देश से,
फिर कहा से फुर्सत हम निकाले ज़माने के लिए.
fantastic faar ke na odaar ke rakh da.
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