Wednesday, June 15, 2011

कविता : क्योंकि बढ़ गये दाम फिर से पेट्रोल के...

ना जाम का  झंझट,ना ट्रैफिक की मारामारी.
ना टक्कर का डर,ना पुलिस से गारागारी.
सबसे बढ़िया है भईया, साईकिल सवारी.
इसलिए पार्ट-पुर्जा गाडी के रख दो खोल के.
क्योंकि बढ़ गये  दाम फिर से पेट्रोल के.
 
कैसे आएगी लोगों के चेहरे पे चमक.
जब जले पे सरकार यूँही छिडकेगी नमक.
एक तो कैसे-कैसे जिंदगी को ढ़ो रहे है लोग.
उपर से बढ़ रहा है महंगाई का जानलेवा रोग. 
लोग पी रहे है जहर को अमृत के तरह घोल के.
क्योंकि बढ़ गये  दाम फिर से पेट्रोल के.
 
पौकेट अपना बन गया है हमसफ़र रकीब का.
मजाक बन के रह गया है सपना गरीब का.
लोगों का रुंह काँप रहा है जाने से दूकान में.
और ब्यस्त है देश के नेता ऊँगली डाले कान में.
लूट रहे है जनता को, खाता स्विस बैंक में खोल के.
क्योंकि बढ़ गये दाम फिर से पेट्रोल के.

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