Thursday, February 11, 2016

कविता : सदा राष्ट्र तेरा ऋणी, रहेगा -- हनुमंथ-- !!





















तुझसे बिछड़ के हम सबका ह्रदय हैं गमगीन  !!
 देख तेरे खातिर कितना रो रहा  सियाचीन    !!

भारत माँ के प्रति तेरा समर्पण रहा अनंत !!
सदा राष्ट्र तेरा ऋणी, रहेगा -- हनुमंथ-- !!

तू मरा नहीं तू जिन्दा हैं हम सबकी दुआओं में 
तेरी शहादत  की चर्चा होगी सदा  फ़िज़ाओं में 

तेरी यादों का दिपक जलता रहेगा सदियों तक,
आबाद रहेगी तेरी खुश्बू सदा इन हवाओं में 

बहुत मुश्किल भूल पाना तुझे सियाचिन के संत !!
सदा राष्ट्र तेरा ऋणी रहेगा -- हनुमंथ-- !!

पुरे देश के खातिर ये खबर हैं दुःखदायक !
नही रहा हमारे बीच, हमारा हिम नायक !

जिसने वतन के खातिर जान गवाँ दी अपनी,
शायद हम ही कुछ नहीं कर पाये तेरे  लायक !

आज अश्रुपूर्ण श्रद्धाँजलि तुझे दे रहा हैं दिग-दिगंत !!
सदा राष्ट्र तेरा ऋणी, रहेगा -- हनुमंथ-- !!


Tuesday, February 2, 2016

ग़ज़ल: अक्सर अपने लोग ही छल जाते हैं !!

अक्सर अपने लोग ही छल जाते हैं !! 
देख के हवा का रुख बदल जाते हैं !!
 
जिनसे होती हैं अहले वफ़ा की उम्मीद,  
वोही ज़माने के रंग में ढल जाते हैं !!
 
हम लुटाते हैं जिनके लिए सबकुछ अपना, 
वो लोग ही अरमानो को मसल जाते हैं !!

रिश्तों को परखा हैं मतलब की आंच पे,
सारे जज़बात पल भर में जल जाते हैं !!
 
लाख नियत तुम्हारी भले साफ़ हो ,
फिर भी दामन पे कीचड़ उछल जाते हैं !! 

"नूरैन" मुद्दत से अपनी ये फितरत रही हैं,
चोट खाते हैं और फिर सम्भल जाते हैं !!

Wednesday, November 11, 2015

ग़ज़ल: हँसने और हँसाने की मेरी आदत नहीं जाती


हँसने और हँसाने की मेरी आदत नहीं जाती !
टूट जाता हूँ पर जीने की ताकत नहीं जाती  !

राहे जिन्दगी में अपनों ने रुलाया हैं बहुत ,
पर बाखुदा मेरे चेहरे से शराफत नहीं जाती ! 

हर बार तेरी महफ़िल में रुसवा हुआ हूँ मैं ,
पर नासमझ दिल से तुम्हारी चाहत नहीं जाती !

जर्रे -बेजार रहा हूँ मैं रंज़ो ग़म की शिद्दत से ,
चाह कर भी खुश-मिज़ाजी की तबीयत नहीं जाती ! 

हर फ़र्ज़ अदा की हमने,मेहनत तेरी वसूलों का,
ये दिगर बात हैं की मुफ़लिसी की हालत नहीं जाती ! 

तू जनता हैं ये खुदा,  बहुत  गुनहगार हैं हम ,
पर तेरे दिल से अपने बन्दों की इनायत नहीं जाती !

कविता : राखी



भारतीय संस्कृति की अनमिट कहानी हैं राखी 
भाई-बहनो के प्रेम की अद्धभुत निशानी हैं राखी 

राखी हरदम याद दिलाती हैं भाई को उसके फर्ज का
भाई आजीवन चुकता करता हैं बहना के इस कर्ज का

इन धागों में रिश्तों की बहुत मजबूत कड़ी हैं
जिसके आगे नतमस्तक सारी दुनिया खड़ी हैं

रिश्तों की नदी में बहने वाली निरंतर पानी हैं राखी
भाई-बहनो के प्रेम की अद्धभुत निशानी हैं राखी

राखी तेरी प्रासंगिकता आज बहुत ही खलती हैं
जब बहने गली मोहल्ले डर -सहम कर चलती हैं

भाई तेरी त्याग-तपस्या,तुझे फिर ललकार रही हैं
देख रोज राक्षसों से सरेआम पवित्र राखी हार रही हैं

फर्ज,समर्पण और बलिदान पे कुर्बानी हैं राखी
भाई-बहनो के प्रेम की अद्धभुत निशानी हैं राखी

Monday, July 27, 2015

___कविता : सदा अमर रहें कलाम_____













देश ने आज अपना एक बहुमूल्य रत्न खोया !
सिसकी वतन की मिट्टी और आसमां भी रोया !
सम्पूर्ण जीवन जिन्होंने कर दिया राष्ट्र के नाम ! 
समस्त भारत का सलाम,सदा अमर रहें कलाम !

देश-दुनिया में थे आपके लाखो-करोड़ों फैन
हम सबके लिए आप थे ग्रेट मिसाइल मैन
बच्चो के प्रति मन में आपके सदा प्रेम-भाव रहा
देश के युवा पीढ़ी से आपका गजब का लगाव रहा
सम्पूर्ण राष्ट्र की सुरक्षा को आपने दिया नया मुकाम !
समस्त भारत का सलाम ,सदा अमर रहें कलाम !

आपने देश के नाम समर्पित कर दी जीवन का हर पल
सदैव तत्पर रहे सुखमय हो कैसे भारत बर्ष का कल
आपकी त्याग,तपस्या,उपलब्धि का सदा देश रहेगा ऋणी
एक सच्चे मार्ग-दर्शक के रूप में याद करेगी हर एक पीढ़ी
युग -युग तक महकेगा आपकी,शख्सियत का गुलफाम !
समस्त भारत का सलाम ,सदा अमर रहें कलाम !

नतमस्तक श्रद्धांजलि :- नूरैन अंसारी

Wednesday, July 1, 2015

ग़ज़ल : वरना टूटे हुए दिल का फौलाद कम नहीं होता.

घर के खाने का कभी, स्वाद कम नहीं होता !
किसी से बिछड़ जाने से,फरियाद कम नहीं होता !
मजबूरियों के सदके ही फासले बन जाते है,
वरना प्रेम और अपनापन का मियाद कम नहीं होता !
तुम्हारी हंसी में ही दिखती है मेरी अपनी खुशनसीबी,
वरना टूटे हुए दिल ,का फौलाद कम नहीं होता !
बात करने से ही बनती है हरदम बात दोस्तों,
खामोशियों से हरगिज बिबाद कम नहीं होता !
"नूरैन" बिखरने दो होंठों पे, हंसी के फुहारों को,
प्रेम से बात कर लेने से जायदाद कम नहीं होता !

Tuesday, June 16, 2015

कविता : मैगी तेरी याद में.…

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यूँ तो खाने के Choice लोगों के,पास बहुत हैं  
मगर एक कोना किचेन रूम का उदाश बहुत हैं 
मैगी तुझसे बिछड़ जाने  का एहसास बहुत हैं 

सदा के लिए अनाथ हो गया स्वाद का एक हिस्सा 
कहर बनकर आया, तेरे जीवन में ये शीशा 
तू कल तक थी साक्षात, आज बन गयी हैं किस्सा 
लोगो में आज भी तेरी यादों की मिठास बहुत हैं 
मैगी तुझसे बिछड़ जाने  का एहसास बहुत हैं 

न कोई नाज-नखरा ,न कोई सोलह श्रृंगार 
चटपट में तू हो जाती थी बनकर के तैयार 
तेरी घर वापसी पे एक दिन  होगा जरूर बिचार 
क्योंकि तेरी चाहत में पागल देवदास बहुत हैं 
मैगी तुझसे बिछड़ जाने  का एहसास बहुत हैं 

निराश बहुत दिखते हैं  तेरे स्वाद के दिवाने 
बैचलर अब सोचते हैं की  क्या बनाये खाने
किचेन रूम के सारे बर्तन मारते हैं ताने 
तू लाख बुरी पर स्वादिस्ट तेरा इतिहास बहुत हैं  
मैगी तुझसे बिछड़ जाने  का एहसास बहुत हैं '