Tuesday, May 17, 2016

ग़ज़ल : हाले दिल सुनाकर लोगों से क्या मिलेगा.



हाले दिल सुनाकर लोगों से क्या मिलेगा
जख्म और गहरे होंगे, दर्द नया मिलेगा 

तुम चाहे अपनी उल्फत की लाख दुहाई दो,  
मगर कोई नहीं हमदर्द ,हमनवां मिलेगा 

रिश्तों की तासीर मतलब तक आ गई हैं 
मुमकिन नहीं उम्मीदों को ,आसरा  मिलेगा 

हसरते उजालों की, शायद ही मंजिल पाये 
अपने हिस्से में रौशनी नहीं, धुँआ मिलेगा 

"नूरैन" राहे उल्फत में चलने की ज़िद छोड़ दे, 
वरना एक दिन इन गुनाहों का सजा मिलेगा 

Wednesday, May 4, 2016

उत्साह गीत















   उत्साह गीत   
राह मुश्किल ही सही ,बढ़ना तो पड़ेगा
हालात बुरा ही सही ,लड़ना तो पड़ेगा
जिंदगी में कुछ भी आसान नहीं दोस्त,
मंज़िल पर्वत ही सही, चढ़ना तो पड़ेगा
कही उम्मीदों के सजर कुम्हला न जाये.
शोले हमारी हिम्मत को जला न जाये .
हद से गुजरना ही सही,गुजरना तो पड़ेगा
मंज़िल पर्वत ही सही, चढ़ना तो पड़ेगा

गुलसिताँ मुकद्दर का आबाद होने तक .
हौसले को बेइन्तहा फौलाद होने तक .
टूट के बिखरना ही सही बिखरना तो पड़ेगा
मंज़िल पर्वत ही सही, चढ़ना तो पड़ेगा

Wednesday, February 24, 2016

ग़ज़ल :निभाओ तो रिश्ते कभी मरते नहीं हैं

जज़बात संगदिल में ठहरते नहीं हैं !
लम्हे इंतजार के जल्दी गुजरते नहीं हैं !

अदद फासलो का होना, दीगर बात हैं ,
पर निभाओ तो रिश्ते कभी मरते नहीं हैं !

ये आजमाया हैं हमने बरसों तलक ,
मायूसी से किस्मत सवरते नहीं हैं !

मुहब्बत से मुमकिन हैं,दुनिया की नेमत ,
लोग नफरत से दिल में उतरते नहीं हैं  !

"नूरैन" जो जख्म,मिलते हैं अपनों के हाथों,
मैंने बरसों तक देखा हैं ,भरते नहीं हैं  !

Thursday, February 11, 2016

कविता : सदा राष्ट्र तेरा ऋणी, रहेगा -- हनुमंथ-- !!





















तुझसे बिछड़ के हम सबका ह्रदय हैं गमगीन  !!
 देख तेरे खातिर कितना रो रहा  सियाचीन    !!

भारत माँ के प्रति तेरा समर्पण रहा अनंत !!
सदा राष्ट्र तेरा ऋणी, रहेगा -- हनुमंथ-- !!

तू मरा नहीं तू जिन्दा हैं हम सबकी दुआओं में 
तेरी शहादत  की चर्चा होगी सदा  फ़िज़ाओं में 

तेरी यादों का दिपक जलता रहेगा सदियों तक,
आबाद रहेगी तेरी खुश्बू सदा इन हवाओं में 

बहुत मुश्किल भूल पाना तुझे सियाचिन के संत !!
सदा राष्ट्र तेरा ऋणी रहेगा -- हनुमंथ-- !!

पुरे देश के खातिर ये खबर हैं दुःखदायक !
नही रहा हमारे बीच, हमारा हिम नायक !

जिसने वतन के खातिर जान गवाँ दी अपनी,
शायद हम ही कुछ नहीं कर पाये तेरे  लायक !

आज अश्रुपूर्ण श्रद्धाँजलि तुझे दे रहा हैं दिग-दिगंत !!
सदा राष्ट्र तेरा ऋणी, रहेगा -- हनुमंथ-- !!


Tuesday, February 2, 2016

ग़ज़ल: अक्सर अपने लोग ही छल जाते हैं !!

अक्सर अपने लोग ही छल जाते हैं !! 
देख के हवा का रुख बदल जाते हैं !!
 
जिनसे होती हैं अहले वफ़ा की उम्मीद,  
वोही ज़माने के रंग में ढल जाते हैं !!
 
हम लुटाते हैं जिनके लिए सबकुछ अपना, 
वो लोग ही अरमानो को मसल जाते हैं !!

रिश्तों को परखा हैं मतलब की आंच पे,
सारे जज़बात पल भर में जल जाते हैं !!
 
लाख नियत तुम्हारी भले साफ़ हो ,
फिर भी दामन पे कीचड़ उछल जाते हैं !! 

"नूरैन" मुद्दत से अपनी ये फितरत रही हैं,
चोट खाते हैं और फिर सम्भल जाते हैं !!

Wednesday, November 11, 2015

ग़ज़ल: हँसने और हँसाने की मेरी आदत नहीं जाती


हँसने और हँसाने की मेरी आदत नहीं जाती !
टूट जाता हूँ पर जीने की ताकत नहीं जाती  !

राहे जिन्दगी में अपनों ने रुलाया हैं बहुत ,
पर बाखुदा मेरे चेहरे से शराफत नहीं जाती ! 

हर बार तेरी महफ़िल में रुसवा हुआ हूँ मैं ,
पर नासमझ दिल से तुम्हारी चाहत नहीं जाती !

जर्रे -बेजार रहा हूँ मैं रंज़ो ग़म की शिद्दत से ,
चाह कर भी खुश-मिज़ाजी की तबीयत नहीं जाती ! 

हर फ़र्ज़ अदा की हमने,मेहनत तेरी वसूलों का,
ये दिगर बात हैं की मुफ़लिसी की हालत नहीं जाती ! 

तू जनता हैं ये खुदा,  बहुत  गुनहगार हैं हम ,
पर तेरे दिल से अपने बन्दों की इनायत नहीं जाती !

कविता : राखी



भारतीय संस्कृति की अनमिट कहानी हैं राखी 
भाई-बहनो के प्रेम की अद्धभुत निशानी हैं राखी 

राखी हरदम याद दिलाती हैं भाई को उसके फर्ज का
भाई आजीवन चुकता करता हैं बहना के इस कर्ज का

इन धागों में रिश्तों की बहुत मजबूत कड़ी हैं
जिसके आगे नतमस्तक सारी दुनिया खड़ी हैं

रिश्तों की नदी में बहने वाली निरंतर पानी हैं राखी
भाई-बहनो के प्रेम की अद्धभुत निशानी हैं राखी

राखी तेरी प्रासंगिकता आज बहुत ही खलती हैं
जब बहने गली मोहल्ले डर -सहम कर चलती हैं

भाई तेरी त्याग-तपस्या,तुझे फिर ललकार रही हैं
देख रोज राक्षसों से सरेआम पवित्र राखी हार रही हैं

फर्ज,समर्पण और बलिदान पे कुर्बानी हैं राखी
भाई-बहनो के प्रेम की अद्धभुत निशानी हैं राखी